अप्रैल का आखिरी हफ्ता मेरी पूरी वजन घटाने की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे कठिन दौर था। अब स्थिति ऐसी बन चुकी थी कि 2 मई 2026 तक 65 किलो वजन तक पहुंचने के लिए एक सप्ताह में पूरे 3.4 किलो वजन कम करना था। सच कहूं तो यह लगभग असंभव जैसा लग रहा था। पिछले कई हफ्तों के ट्रैक रिकॉर्ड को देखकर मुझे पहले ही अंदाजा हो गया था कि मेरा वजन 68 किलो के आसपास तक ही घट पाएगा। इसलिए आखिरी हफ्ते में मेरे सामने सिर्फ एक ही विकल्प था, जितना हो सके उतना ज्यादा वजन घटाकर 65 किलो के करीब पहुंचना।
इसी सोच के साथ मैंने अपनी दिनचर्या को और कठोर बना दिया। पहले मैं केवल सुबह वर्कआउट करता था, लेकिन अब मैंने शाम की आउटडोर रनिंग भी शुरू कर दी। सुनने में यह फैसला आसान लगता है, लेकिन असल जिंदगी में यह शरीर और दिमाग दोनों की कठिन परीक्षा थी। पारिवारिक दायित्वों से बंधा एक 43 वर्षीय नौकरीपेशा व्यक्ति, जिसकी सुबह से शाम तक की नौकरी हो, उसके लिए सुबह जिम करना और फिर पूरे दिन की थकान के बाद शाम को रनिंग करना बिल्कुल आसान नहीं था।
रविवार, सोमवार और मंगलवार लगातार मैंने सुबह वर्कआउट किया और शाम को रनिंग की। बुधवार को केवल सुबह की वर्कआउट और गुरुवार को सुबह आउटडोर रनिंग की। शुक्रवार को एक बार फिर खुद को पूरी तरह उस प्रयास में झोंक दिया। सुबह वर्कआउट और शाम को रनिंग की।
असल में इस आखिरी हफ्ते में मेरी मनोदशा उस छात्र जैसी थी जो पूरे साल सामान्य पढ़ाई करता है, लेकिन बोर्ड परीक्षा से एक रात पहले पूरा सिलेबस पढ़ लेना चाहता है। अब मुझे लक्ष्य से ज्यादा इस बात की चिंता थी कि अंतिम दिन तक मेरे प्रयासों में कोई कमी न रह जाए।
फिर आखिरकार 2 मई 2026, शनिवार का वह दिन आ ही गया जिसका मैं पिछले पांच महीनों से इंतजार कर रहा था। उस दिन लगभग 2 घंटे वर्कआउट के कारण बढ़ी हुई धड़कने तब और ज्यादा बढ़ गयी जब मैं वजन मापने वाली मशीन की ओर बढ़ा। ऐसा लग रहा था जैसे बोर्ड परीक्षा का परिणाम देखने जा रहा हूँ। परिणाम का अंदाजा होते हुए भी मन में उत्साह और जिज्ञासा थी।
लेकिन जैसे ही मैंने मशीन पर अपना वजन देखा, कुछ क्षणों के लिए जैसे सब कुछ थम सा गया। मुझे अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हुआ। बहुत लंबे समय बाद एक ही सप्ताह में इतना ज्यादा वजन कम हुआ था। पूरे 1 किलो 100 ग्राम वजन घटकर अब मेरा वजन 67.300 किलो हो चुका था। उस पल जो खुशी महसूस हुई उसे शब्दों में बयान करना आसान नहीं है। हाँ, यह सच है कि मैं अपने तय लक्ष्य 65 किलो तक नहीं पहुँच पाया था। अभी भी लगभग 2 किलो की दूरी बाकी थी, लेकिन फिर भी आखिरी हफ्ते का यह परिणाम मेरे लिए केवल एक संख्या से कही अधिक पाँच महीनों की ईमानदार मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का प्रमाण था।
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| 02 मई 2026 का फाइनल रिजल्ट |
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| घटते वजन का साप्ताहिक रुझान |
वैसे भी जिंदगी में 100 प्रतिशत परिणाम तो प्रतिभाशाली छात्रों को भी नहीं मिलते, और मैं तो हमेशा एक औसत छात्र ही रहा हूँ। भले ही मैं लक्ष्य से थोड़ा दूर रह गया था, लेकिन जो परिणाम मिला वह मेरी शुरूआती उम्मीदों से कहीं बेहतर था।
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| घटते वजन का साप्ताहिक चार्ट |
सच कहूँ तो जब मैंने सार्वजनिक रूप से अपने वजन घटाने के लक्ष्य की घोषणा की थी, तब मुझे स्वयं भी पूरा विश्वास नहीं था कि मैं इतना वजन घटा पाऊँगा। इससे पहले भी मैं कई बार योजनाएँ बनाकर असफल हो चुका था। उन असफलताओं ने भीतर कहीं यह डर भी पैदा कर दिया था कि शायद इस बार भी मैं बीच रास्ते थककर रुक जाऊँ। लेकिन इस बार एक चीज अलग थी। वह थी मेरी सार्वजनिक घोषणा। उस घोषणा ने जैसे मेरे लिए पीछे लौटने के रास्ते थोड़े कठिन कर दिए थे। अब केवल मैं ही नहीं, बल्कि बहुत से लोग भी मेरे इस सफर को देख रहे थे। जब भी मन कमजोर पड़ता या आलस्य हावी होने लगता, वही घोषणा मुझे फिर से मेरे लक्ष्य की ओर खड़ा कर देती। कई बार मैं खुद उसे दोबारा लोगों के सामने रख देता, ताकि लक्ष्य कभी मेरी नजरों से दूर ना होने पाए।
इस सफर के दौरान यह एहसास भी हुआ कि हेल्दी डाइट कोई सजा नहीं होती, अगर घर में स्वाद और सेहत के संतुलन के साथ खाना बनाया जाए तो वही भोजन जीवनशैली का हिस्सा बन जाता है। इस दौरान कई ऐसी हेल्दी रेसिपीज घर पर बनाई गईं जिन्होंने वजन घटाने के इस कठिन सफर को काफी आसान बना दिया। ऐसी ही स्वाद और सेहत से भरपूर रेसिपीज सीखने के लिए Neetu’s Kitchen को जरूर देखिये। वहाँ घर पर आसानी से बनाई जा सकने वाली 100 से अधिक हेल्दी रेसिपीज साझा की गई हैं, जो फिटनेस और स्वाद दोनों का संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं। इन पाँच महीनों के दौरान मेरी डाइट मुख्यतः प्राकृतिक, प्रोटीन और फाइबर आधारित रही, जिसमें लगभग निम्न चीजें शामिल थीं:-
- सर्दियों में पूरे दिन लगभग 3 से 4 लीटर और गर्मियों में 5 से 6 लीटर पानी पीना।
- सुबह उठते ही वर्कआउट से पहले बिना चीनी की ब्लैक कॉफी।
- वर्कआउट के तुरंत बाद सुबह 5 अंडों का केवल सफेद भाग।
- 150 ग्राम पनीर या 150 ग्राम उबला हुआ चिकन।
- उबली हुई मिक्स सब्जियाँ जिनमें आधा चम्मच घी के साथ सोया बड़ी, गोभी, गाजर, मटर, शिमला मिर्च, मशरूम आदि शामिल रहते थे। या फिर कम तेल में बनी घर की सब्जी के साथ मल्टीग्रेन आटे की दो रोटियाँ।
- खाने के साथ भरपूर सलाद।
- शाम को 5 अंडों का सफेद भाग।
- पूरे दिन में दो या तीन फल जैसे सेब, अमरूद, आड़ू, ककड़ी आदि।
- शाम को 150 ग्राम भुने हुए चने और 50 ग्राम ड्राई नट्स जिनमें अखरोट और बादाम प्रमुख थे।
- दिन में दो बार बिना चीनी की अदरक, इलायची व कालीमिर्च युक्त ब्लैक टी।
- रात को एक बड़ी कटोरी दाल।
कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी थे जिन्हें मैंने पूरे पाँच महीने स्वयं से निर्वासित कर दिया था।
- चीनी, चावल, दूध वाली चाय, तली हुई ऑयली सब्जियाँ, पराँठे, छोले भटूरे, रसगुल्ले, मिठाइयाँ, केक, पेस्ट्री, कोल्ड ड्रिंक, आलू, शकरगंदी तथा अन्य हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स और हाई कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ।
वैसे तो हमारे देश में हर वर्ष हजारो लोग अपना वजन घटाते हैं. लेकिन मेरे इस सफर की कुछ विशेषताएँ ऐसी रहीं जिन्होंने इसे सामान्य वजन घटाने की यात्राओं से अलग बना दिया।
- पाँच माह लंबे इस सफर में मैंने किसी भी प्रकार के मानव निर्मित फूड सप्लीमेंट्स जैसे प्रोटीन पाउडर, फैट बर्निंग कैप्सूल, वजन घटाने के इंजेक्शन या स्टेरॉइड आदि का इस्तेमाल नहीं किया।
- इस सफर में मैंने प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर अधिकतर प्राकृतिक और घर पर बने भोजन को प्राथमिकता दी।
- पूरे सफर में एक दो अवसरों को छोड़कर चीनी और उससे बने पदार्थों से पूरी दूरी बनाए रखी।
अपने अनुभव के आधार पर मैं उन लोगों को कुछ सुझाव देना चाहता हूँ जो वजन घटाना तो चाहते हैं, लेकिन नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारियों या समय की कमी के कारण शुरुआत ही नहीं कर पाते।
- सबसे पहले अपने भीतर एक मजबूत मोटिवेशन तलाश करिए, क्योंकि वही कठिन दिनों में आपको टूटने नहीं देता।
- यदि आपने वजन घटाने का निर्णय लिया है तो शुरुआत में शरीर पर अत्यधिक दबाव मत डालिए। शरीर को धीरे धीरे व्यायाम का अभ्यस्त बनने दीजिए। तेज कदमों से चलना सबसे अच्छी शुरुआत है। अपने शरीर के संकेतों को समझिए और जब शरीर मेहनत को सहजता से स्वीकार करने लगे तभी धीरे धीरे व्यायाम की तीव्रता बढ़ाइए।
- यदि खाने की क्रेविंग नियंत्रित नहीं कर पाते तो अचानक बहुत कठोर डाइट अपनाने की कोशिश मत कीजिए। केवल भोजन की मात्रा धीरे धीरे 60 से 70 प्रतिशत तक कर दीजिए। मेरे अपने शरीर को भी क्रेविंग नियंत्रित करने में लगभग 10 से 15 दिन लगे थे।
- वजन घटाने में परफेक्शन से ज्यादा जरूरी निरंतरता होती है। जब मन बदलने लगता है, तब शरीर भी धीरे धीरे बदलना शुरू कर देता है।
सही मायनों में मेरे लिए यह केवल वजन घटाने का सफर नहीं था। यह उस विशाल को फिर से पाने का सफर था जो कभी जिंदगी के अप्रत्याशित हादसों और वक्त के कठोर थपेड़ों के बीच कहीं खो गया था। उन कठिन वर्षों ने केवल शरीर को ही नहीं बदला था, बल्कि भीतर के उस बेफिक्र, खुशमिजाज और जिंदगी को खुलकर जीने वाले विशाल को भी धुंधला कर दिया था। लेकिन आज जब आईने में खुद को देखता हूँ तो केवल बदला हुआ शरीर दिखाई नहीं देता, बल्कि वही मौलिक विशाल फिर से नजर आता है जो समय में कहीं पीछे छूट गया था। फर्क सिर्फ इतना है कि अब वह पहले से अधिक जिम्मेदार, अधिक परिपक्व और भीतर से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुका है।
अंत में उन सभी लोगों का दिल से धन्यवाद जिन्होंने इस सफर में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मेरा साथ दिया। क्योंकि कई बार इंसान अकेले मेहनत जरूर करता है, लेकिन मंजिल तक पहुँचने की हिम्मत उसे अपनों के विश्वास से ही मिलती है।
घोषणा से बदलाव तक: खुद को खोकर फिर से पाने का सफर - PART 1
घोषणा से बदलाव तक: खुद को खोकर फिर से पाने का सफर - PART 2




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