घोषणा से बदलाव तक: खुद को खोकर फिर से पाने का सफर - PART 1



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वजन बढ़ना कभी कभी सिर्फ शरीर का बढ़ना नहीं होता। कई बार उसके पीछे टूटता हुआ मन, बिखरती हुई आदतें और भीतर से धीरे धीरे थकता हुआ इंसान छिपा होता है। मेरी कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

मेरा नाम विशाल आनन्द है और मेरी उम्र लगभग 43 वर्ष है। एक आम नौकरीपेशा इंसान की तरह मेरी भी सिटिंग जॉब है, जो मेरे दिन का एक बड़ा हिस्सा ले लेती है। वर्ष 2019 तक जिंदगी सामान्य गति से चल रही थी, लेकिन 2020 और 2021 में लगातार हुए दो अप्रत्याशित और गंभीर हादसों ने जीवन की लय को पूरी तरह बदल दिया। उन हादसों के बाद मैं डिप्रेशन, ऐंगज़ाइटी और अनिंद्रा जैसी समस्याओं से घिर गया। जीवन में आई इस उथल पुथल ने मेरा खान पान, दिनचर्या और व्यवहार सब बदल दिया। धीरे धीरे इसका असर मेरे शरीर पर भी दिखाई देने लगा और 70 से 75 के बीच रहने वाला मेरा वजन तेजी से बढ़ने लगा। बढ़ता हुआ यह वजन केवल शरीर का बदलाव नहीं था, बल्कि भीतर चल रहे संघर्षों का भी एक मौन प्रतिबिंब था।

जनवरी 2024 की शुरुआत तक मेरा वजन लगभग 86 किलो पहुँच चुका था। मेरी हाइट के अनुपात में यह वजन काफी ज्यादा था और शरीर लगातार भारी तथा थका हुआ महसूस होने लगा था। धीरे धीरे इसका असर मेरे आत्मविश्वास पर भी दिखाई देने लगा। हालाँकि समय के साथ जीवन की परिस्थितियाँ धीरे धीरे संभलने लगीं और जीवन सामान्य होने लगा।   
 
वर्ष 2024 में जाने कब मैंने खुद को दोबारा आईने में देखना शुरू किया तो ऐसा लगा जैसे आईने में खड़ा इंसान मैं होकर भी मैं नहीं था.  तब पहली बार एहसास हुआ कि मैंने केवल शरीर की फिटनेस ही नहीं बल्कि कहीं न कहीं अपना मौलिक स्वरूप भी खो दिया है। 

वर्ष 2025 में मैंने कई बार खुद पर काम शुरू किया, लेकिन हर बार निरंतरता बनाए रखने में असफल रहा। शुरुआत हमेशा पूरे जोश और उत्साह के साथ करता, लेकिन दो चार दिन बाद भीतर का उत्साह धीरे धीरे ठंडा पड़ जाता। देखते ही देखते पूरा साल इसी कशमकश में निकलने लगा कि चलो यह महीना तो गया, लेकिन अगले महीने से पक्का वजन घटाना शुरू करूँगा।

 हर महीने खुद से पक्के वादे और प्रतिज्ञाबद्ध होने के बावजूद  मैं अपनी इस निरन्तरता को बनाए रखने में बार बार विफल रहा। पूरे साल भर मेरी वजन घटाने की नई नई घोषणाएं सुनते सुनते मेरे परिवार वालों और ऑफिस के साथियों ने मेरी बातों को गंभीरता से लेना बंद कर दिया। उन्हें लगने लगा था कि मेरी बातें केवल कुछ दिनों के उत्साह तक सीमित रहती हैं। इसी तरह समय बीतता गया और नवंबर 2025 आ गया। मैं इसी पशोपेश में उलझा हुआ था कि आखिर मैं ऐसा क्या करूं जिससे मेरी डाइट और वर्कआउट की निरन्तरता बनी रहे और मैं अपना वजन घटा पाऊँ।

मेरे मन में एक विचार आया कि क्यों न मैं अपने वजन घटाने के इस संकल्प की एक सार्वजनिक घोषणा कर दूँ।  ऐसा करने से मुझे कुछ सीधे फायदे होंगे। एक फायदा यह होगा कि लोगों को पहले से मेरी डाइटिंग के बारे में पता रहेगा और बार बार चाय, समोसे या पकौड़ियों के लिए मना करने की असहज स्थिति से बच जाऊँगा। लेकिन मेरे इस विचार का सबसे बड़ा  नुकसान यह था कि अगर पहले की तरह मैं इस बार भी गंभीरता से अपनी कार्ययोजना में निरन्तरता नही बनाए रख पाया तो मैं सबके सामने सार्वजनिक रूप से हास्य का पात्र बन जाऊंगा। यह जोखिम मेरे लिए छोटा नहीं था, लेकिन पिछली असफलताओं को देखते हुए मुझे महसूस हुआ कि इस बार मुझे अपने लिए पीछे लौटने के रास्ते बंद करने होंगे। काफी सोच विचार के बाद आखिरकार मैंने सार्वजनिक घोषणा करने की इस रणनीति पर अपनी मुहर लगा दी।

01 DEC 2025 : WEIGHT 84 Kg 

इस तरह 1 दिसंबर 2025 को, जब मेरा वजन लगभग 84 किलो था, मैंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने वजन घटाने की योजना की सार्वजनिक घोषणा कर दी। अपनी योजना के अनुसार मैंने बिना किसी मानव निर्मित फूड सप्लीमेंट जैसे प्रोटीन पाउडर या फैट बर्निंग कैप्सूल इत्यादि  का सहारा लिए 30 अप्रैल 2026 तक अपना वजन 84 किलो से घटाकर 65 किलो तक लाने का लक्ष्य रखा।

पाँच महीनों में 19 किलो वजन घटाने का यह सफर आसान नहीं था। यह केवल शरीर की नहीं बल्कि इच्छाशक्ति की भी कठिन परीक्षा होने वाली थी।

सबसे पहले मैंने अपने एक डाइटीशियन मित्र से संपर्क किया और अपनी उम्र, सिटिंग जॉब तथा उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित डाइट प्लान तैयार करवाया। इतने भारी वजन के साथ दौड़ना न तो मेरे लिए संभव था और न ही समझदारी का काम। इसलिए मैंने शुरुआत केवल प्रातःकाल 2 से 3 किलोमीटर की मॉर्निंग वॉक से की।

लगातार 20 दिनों तक मैंने पूरी ईमानदारी और अनुशासन के साथ यही दिनचर्या अपनाई।

लेकिन 20 दिसंबर आते आते ठंड ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए। सर्दी लगातार बढ़ती जा रही थी और इसके साथ ही मेरी वह सार्वजनिक घोषणा भी धीरे धीरे सोशल मीडिया फीड और लोगों की यादों में धुंधली पड़ने लगी थी। बढ़ती ठंड जैसे मेरे भीतर जल रही शुरुआती ऊर्जा को भी धीरे धीरे शांत करने लगी थी।

बढ़ती सर्दी, खराब होता AQI, बढ़ता आलस और इन सबके बीच कमजोर पड़ते हौसलों ने आखिरकार असर दिखाना शुरू कर दिया। 21 दिसंबर 2025 से मेरा प्रातः भ्रमण पूरी तरह बंद हो गया।

मगर इस निराशा के बीच एक अच्छी बात यह हुई कि इस दौरान मैंने अपने डाइट प्लान का पूरे अनुशासन के साथ नियमित पालन किया। हालांकिमेरी पिछली असफल कोशिशों को देखते हुए नेहा ने इस बार मेरी इच्छाशक्ति की कड़ी परीक्षा लेने के लिए एक बहुत ही अनोखा तरीका अपनाया । उदाहरण के लिए जब वह मेरे लिए डाइट के अनुसार उबली हुई सब्जियां लाती तो साथ में वह अपने लिए बनाए हुए बेहतरीन और लजीज व्यंजन भी लाकर मेरे ठीक सामने रख देती। 


इसे संयोग समझकर शुरुआत  में  मैं उसके इस स्वादिष्ट जाल में कई बार फंसा और डाइट तोड़ दी। लेकिन कुछ दिनों बाद मुझे उसके इस व्यवहार का असली उद्देश्य समझ आने लगा। नेहा मेरी पिछली कई कोशिशों की असफलता देख चुकी थी इसलिए इस बार वह मेरे इस सार्वजनिक संकल्प के पीछे छिपी वास्तविक इच्छाशक्ति को परख रही थी। यह समझ आने के बाद मैंने अपने डाइट प्लान का दृढ़ता के साथ पालन करना शुरू कर दिया।

31 दिसंबर 2025 तक प्रातः भ्रमण बंद रहने और केवल डाइट के अनुशासन के सहारे मेरा वजन लगभग 3 किलो तक कम हो चुका था। बाहर ठंड दिन प्रतिदिन और ज्यादा कड़ाके की होती जा रही थी और मेरे भीतर का उत्साह एक बार फिर  बुझने लगा  था। मुझे महसूस होने लगा था कि अगर मैंने जल्दी ही खुद को दोबारा मोटिवेट नहीं किया, तो मेरी वजन घटाने की यह प्रक्रिया एक बार फिर रुक जाएगी।

इन्हीं विचारों के बीच 31 दिसंबर 2025 की शाम को मैंने 1 दिसंबर वाली अपनी पुरानी सार्वजनिक घोषणा को सोशल मीडिया पर दोबारा री पोस्ट कर दिया। वह रिपोस्ट दरअसल दूसरों से ज्यादा खुद को फिर से याद दिलाने के लिए थी।

नववर्ष 1 जनवरी 2026 की सुबह मैं कपकपाती ठंड में आलस छोड़कर प्रातः भ्रमण पर गया। उसी दिन एक मित्र की नजर मेरी सोशल मीडिया पोस्ट पर पड़ी। उसने हल्के फुल्के मजाक के तौर पर मेरी  पोस्ट को संदर्भित करते हुए एक वीडियो व्हाट्सएप ग्रुप में साझा कर दी।

वीडियो में एक व्यक्ति नए साल के पहले दिन बड़े उत्साह से अपना डाइट प्लान बना रहा होता है। तभी उसका एक साथी गरम समोसे लेकर आता है और अगले ही पल वह व्यक्ति अपने उसी डाइट प्लान वाले कागज को फाड़कर उस पर समोसे रखकर बड़े मजे से खाने लगता है।

ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरी पिछले पूरे एक साल की असफलताओं को कुछ सेकंड के वीडियो में बदलकर मेरे सामने रख दिया हो। ग्रुप के बाकी लोगों ने उसे केवल हास्य के रूप में देखा,  लेकिन मेरे भीतर चल रही उथल पुथल से अनजान वे लोग शायद यह नहीं समझ सकते थे कि उस छोटी सी घटना ने मुझे भीतर तक विचलित कर दिया था।मुझे अचानक अपने संभावित भविष्य की एक असहज तस्वीर दिखाई देने लगी। मैं समझ गया था कि अगर इस बार भी मेरी वजन घटाने की योजना पहले की तरह असफल हुई, तो लोगों की नजरों में मेरी छवि भी विडिओ में दिखाए उसी व्यक्ति जैसी बन जाएगी जो हर साल बड़े उत्साह से योजनाएँ तो बनाता है, लेकिन क्षणिक लालसाओं के आगे हार मान लेता है।

शायद पहली बार मुझे लोगों की हँसी से ज्यादा खुद की नजरों में गिर जाने का डर महसूस हुआ। इस बार असफलता का डर केवल लक्ष्य अधूरा रह जाने का नहीं था, बल्कि खुद की विश्वसनीयता खो देने का भी था।

सच कहूँ तो यही वह सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था जहाँ से वजन घटाने की मेरी सामान्य योजना एक अभियान में बदल गई।

घोषणा से बदलाव तक: खुद को खोकर फिर से पाने का सफर - PART 2

 घोषणा से बदलाव तक: खुद को खोकर फिर से पाने का सफर - PART 3

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